दोनों में चादर की खींचतान
कभी दायें कभी बायें
बीच में थोडी सी खाली जगह
कपडों के भीतर से शरीर में पहुंचती ठिठुरन
धुंध और कोहरा ऐसा
जैसे शहर के लोगों ने
बीच में थोडी सी खाली जगह
कपडों के भीतर से शरीर में पहुंचती ठिठुरन
धुंध और कोहरा ऐसा
जैसे शहर के लोगों ने
एक साथ अगरबत्तियां जलाई हो,
बिल्कुल सोंधी सी खूश्बू कोहरे की
कोहरे के डर से सूरज नहीं दीखता
छिपकर कहीं दूर से देखता कोहरे को
कोहरे में लिपटी दिल्ली में
दो लोगों के बीच चादर की खींचतान
कभी इस तरफ कभी उस तरफ,
बिल्कुल सोंधी सी खूश्बू कोहरे की
कोहरे के डर से सूरज नहीं दीखता
छिपकर कहीं दूर से देखता कोहरे को
कोहरे में लिपटी दिल्ली में
दो लोगों के बीच चादर की खींचतान
कभी इस तरफ कभी उस तरफ,
कभी दायें कभी बायें
ये शहर दिल्ली है.
ये शहर दिल्ली है.
1 comment:
delhi ki sardi hi aisi hai jo yeh sab karati hai waise kavita bohot achhi hain bohot badiya lekin maa wali sabse achhi uss kavita kaa koi saani nahin agar khud bhi chaho ki dobara waisi hi kavita likh do to sambhav nahin .
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