चांद से इतना करीबी रिश्ता कभी महसूस नहीं हुआ था. कभी लगा ही नहीं था कि, मेरे कहने भर से ये उतर आयेगा जमीं पर और कहेगा, लो! मैं आ गया. बचपन में जब दादी कह्ती थी " चंदा मामा दूर के, पुए पकाये गुड के, आप खाये थाली में, मुन्ने को दे प्याली में", तो सोचता था चांद दूर के रिश्तेदार हैं मेरे. जब तक गांव रहा पुए गुड के ही रहें और चंदा भी तब तक दूर ही रहा. गांव की गलियों से होते हुए, मैं मुम्बई पहुंचा और फिर बैन्डस्टैन्ड. समझ में आया. दादी चंदा को दूर तो कह्ती थी लेकिन मामा क्यों कहती थी. चंदा के मामा होने का अहसास बैन्डस्टैन्ड पे हो ही गया. इतना करीब कि, थोडा उछल के, हाथ लगाके, पकडके, दूसरी हथेली पे छाप लेलूं. खुले आकाश में सिर्फ़ चंदा ही नज़र आ रहा था. बडा सा. मैंने देखा चांद के साथ सिर्फ़ दो तारें ही थें. तारों की फ़ौज को मैंने पहले कई बार आपस में मौज करते देखा था. लेकिन, बस दो तारें को चांद का पीछा करते हुए पहली बार देखा. शायद कुछ और रोशनी की ज़िद पे होंगे. "आप खाये थाली में, मुन्ने को दे प्याली में", मामा को यह अह्सास हो गया हो की मैं बडी दूर से इस दूरी को खतम करने आया हूं. रिश्ते दूरी को तय करके ही तो मढे जाते हैं. एक काले पत्थर पे बैठे मैं चांद से बतिया रहा था. पीछे से तेज़ आवाज़ आई "चाय लेलो, चाय". चांद ने मुन्ने के लिए प्याली भेजी थी. बैन्डस्टैन्ड पे समुद्र की लहरें मेरे पांव में गुदगुदी लगाने को आपस में होड लगाये बैठी थी, कभी लहरें उछल के मेरे उपर गिर पडती थी, बालों पे, कमीज पे. कुछ तो पाकेट के अन्दर समा जाती, पता नहीं मेरे साथ होना चाहती थी या मेरी हैसियत का पता लगा रही थी. प्याला थामे, मैं एक एक घूंट पीये जा रहा था और मिट रही थी मेरे और चंदा के बीच की दूरी, फ़र्क मिट रहा था दादी और चांद में, तय हो रहे थें गांव और मुम्बई के बीच का सफ़र. चंदा मामा अब दूर नहीं रहें.
8 comments:
हिंदी लिखाड़ियो की दुनिया मे आपका स्वागत। अच्छा लिखे । बढि़या लिखे। इस शुभकामना के साथ।
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आपका स्वागत है।
वाह भाई वाह...........क्या बात है
क्या अंदाज है बात कहने का
अच्छा अंदाज़, लिखते रहिये
चिट्ठाजगत में आपका हार्दिक स्वागत है
रचना पर टिपण्णी उसे पढ़ने के बाद दूँगी , शुभ-कामनाएं
मेरा ब्लाग आपकी टिपण्णी-सज्जा के लिए आतुर है कृप्या एक बार अवश्य पधारें
हिन्दी ब्लॉग जगत में प्रवेश करने पर आप बधाई के पात्र हैं / आशा है की आप किसी न किसी रूप में मातृभाषा हिन्दी की श्री-वृद्धि में अपना योगदान करते रहेंगे!!!
इच्छा है कि आपका यह ब्लॉग सफलता की नई-नई ऊँचाइयों को छुए!!!!
स्वागतम्!
लिखिए, खूब लिखिए!!!!!
प्राइमरी का मास्टर का पीछा करें
हूं....साहित्य की हर विधा में शायद चांद पर सबसे ज़्यादा लिखा गया है....आपने भी अच्छा लिखा है...आगे भी लिखते रहें...
very gud...it was owsome....its great imagination....about chanda mama,,,
आपका ब्लॉग अच्छा लगा । यूँ ही लिखते रहिये । धन्यवाद !
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