तुम्हारे लिये मैंने कुछ नहीं खरीदा
ईश्वर को भी आजतक कुछ नहीं दिया
मां भी वंचित है मेरे द्वारा कुछ भी पाने से,
तुम सबों से अभी तक लेता ही आया हूं,
ममता की छांव, मां की आंचल से,
ईश्वर ने दिया है ये जीवन,
और तुमने, तुमने दिया है प्रेम,
जीने की वजह.
सोचता हूं लौटाऊंगा,
इसके एवज में कुछ
पर इसे बदले की बात मान
खामोश हो जाता हूं,
सच ये भी है कि मेरे बटूएं में कुछ नहीं है
सिर्फ़ एहसास है
मेरे पास यही है कि
मुझे मां, ईश्वर और तुमसे प्रेम है.
6 comments:
जिसके पास प्रेम है उसके पास सिफ़र तो कुछ भी नही |
अच्छा लिखते है आप |
लिखते रहें |
really gud!
aap bahut acha likhte hai mujhe pata nahi tha............... humare upar bhi kuch likhiye tab jaane
waiting........................
Truly inspiring! blessed to knw a talented person like u:) sky is ur limit.
bahut achha flow aur soch aapki
this appears to be my story. rather everyone's story
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