Monday, April 20, 2009

ऐसी तैसी

दीवारों की ऐसी तैसी, सरकारों की ऐसी तैसी

खादी पहन जो देश को लूटे, गद्दारों के ऐसी तैसी

साहूकारों की ऐसी तैसी, पहरेदारों की ऐसी तैसी

बच्चे जहां भूखे मरे, दूकानदारों की ऐसी तैसी

बाज़ारों की ऐसी तैसी, हज़ारों की ऐसी तैसी

मां जिनसे बेटा खो दे, हथियारों की ऐसी तैसी

परिवारों की ऐसी तैसी, रिश्तेदारों की ऐसी तैसी

मां की आंख में आंसू जो दे, ईमानदारों की ऐसी तैसी

नज़ारो की ऐसी तैसी, उन प्यारों की ऐसी तैसी

होठ पे हंसी दिलमें खंज़र, कलाकारों की ऐसी तैसी

सितारों की ऐसी तैसी, बहारों की ऐसी तैसी

दिल टूटे जिस दिल्ली में, दिलदारों की ऐसी तैसी.

10 comments:

Udan Tashtari said...

ऐसी भयंकर ऐसी तैसी आज तक नहीं देखी..बहुत खूब!!

जयंत - समर शेष said...

Achchha hai..

Aisi Taisi..

~JC

श्यामल सुमन said...

बहुत खूब है ऐसी तैसी। कहते हैं कि-

अमन चोर देखो अमन बेचते हैं।
कफन चोर देखो कफन बेचते हैं।
पहरूआ बनाया जिसे जन वतन का,
वो दिल्ली में बैठे वतन बेचते हैं।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

Unknown said...

jaise ho waise rehna khushi hoti hai itni sachai tumhari aankhon mein dekhkar agar badlein to maa kasam tumhari aisi tasi......
abhi jitna hai dost aur duniya ki karni hai aisi taisi.....

Unknown said...

You are incredible dude:-)

Suman Prasad said...

क्यों कर रहे हो सब की एसी की तैसी ?..........

बोलो........... सब की जय हो!



दीवारों की जय हो! , सरकारों की जय हो!

खादी पहन जो देश को लूटे, गद्दारों के जय हो!

साहूकारों की जय हो!, पहरेदारों की जय हो!

बच्चे जहां भूखे मरे, दूकानदारों की जय हो!

बाज़ारों की जय हो! , हज़ारों की जय हो!

मां जिनसे बेटा खो दे, हथियारों की जय हो!

परिवारों की जय हो! , रिश्तेदारों की जय हो!

मां की आंख में आंसू जो दे, ईमानदारों की जय हो!

नज़ारो की जय हो! , उन प्यारों की जय हो!

होठ पे हंसी दिलमें खंज़र, कलाकारों की जय हो!

सितारों की जय हो! , बहारों की जय हो!

दिल टूटे जिस दिल्ली में, दिलदारों की जय हो!



*/* sorry for making changes in your original creation, pls don't mind */*

lokesh said...

BAHUT BADIYA RITU JEE IS AISI TAISI NE TO HUM SAB KI LAGA RAKHI HAI DUNIYA NE IS AISI TAISI KO PAKAR RAKHA HAI PAR NA JANE HUM KAB MUKT HONGE UMDA HAI KAVITA

kumar Dheeraj said...

कहां हो भाई लगता है कि कहीं लम्बा गुल खिला रहे हो । तुम्हारा पोस्ट पढ़ा अच्छा तो तुम शुरू से ही लिखते हो । विशेष मेरा ब्लाग भी जरूर पढ़ना । धीरज कुमार डी डी न्यूज
khalihaan.blogspot.com

Unknown said...

good one, i hope u should think about how can we overcome that kind of "aisi taisi" situation.

ritu raj said...

Dheeraj bhai Delhi me hi hoo aur Gul khilane ke beej Daal raha hoo.
Insha-allah kuchh na kuchh to ug hi aayega. Thank u very much.