बनकर फूल खिलो गुलशन में, डरकर तुम क्या पाओगे
जो पाया है बांट दो सबकुछ, लेकर तुम क्या जाओगे
हंसते खिलते चेहरो से, दिल का दर्द मिटाओगे
बांटोगे जो बबूल के बीज, बेर कहां से पाओगे
खुशी के दीप जलाकर तुम, गम की रात भगाओगे
सूरज को दिखा के राह, नया सवेरा लाओगे
बनकर बादल आसमां में, जो तुम छा जाओगे
पड के बून्द जमीं पे तुम, सबकी प्यास मिटाओगे
बडे न बनना खजूर जैसे, ऊंचे ही रह जाओगे
खिलोगे जो गुलाब बनके सबका आंगन सजाओगे
तुमसे होगी जवां महफ़िलें, गीत गज़ल जो गाओगे
खुशी बांटके दर्द जो लोगे, सबकी दुआयें पाओगे
हिम्मत से ही तो दुनिया में, सबने जग को जीता है
मन में विश्वास रखोगे तो, तुम भी जीत जाओगे
बनकर फूल खिलो गुलशन में, डरकर तुम क्या पाओगे
6 comments:
waah waah waah waah
anand aa gaya
badhai
thank u khatri sir.
that's the way to live...
good one
bahut khub
a real and true description of HOW one ought to lead his/her life. not merely for oneself but for others with all our true spirits
hey its too gud yaar....man gaye kya likhte ho....
gud...keep it up...
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