सलाम करता चलूं!
खूश्बू जैसे शब्द खिले हैं.
Friday, August 14, 2009
कितना साधारण
होठ पे हंसी की बूंदाबूंदी
आंखों में ख्वाबों की चहल-पहल
इशारों में कलाकारी
बातों से तीरंदाजी
सब बातें तुममे
सबकुछ खास तुम्हारा
और मैं...
कितना साधारण.
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