Sunday, January 17, 2010

दो-दो दिन पे खफ़ा होना, तुम

कुछ अगर होना हो तो
मेरे लिये मां होना
तुम
सारी दुनियां एक तरफ़
मेरा सारा जहां होना
तुम

रिश्ते नाते सब है बातें
छोटी मोटी वफ़ा होना
तुम
मुझमें रहके कभी कभी
हल्के फ़ुल्के जुदा होना
तुम

धन-दौलत न चांदी सोना
मेरे लिये हवा होना
तुम
मंदिर मस्जिद मैं न जाऊं
मेरे भीतर खुदा होना
तुम

तुमको देख मैं पगला जाऊं
नीली-पीली अदा होना
तुम
मर जाऊं जिन्दा भी रहूं
दो-दो दिन पे खफ़ा होना
तुम

1 comment:

Udan Tashtari said...

बेहतरीन!!