Thursday, January 21, 2010

चलो, प्याली में चांद पीया जाये.

१.
धूप की सरकार गिर गई
सूरज नज़रबंद हुआ है
मौसम का दिल है जला
कोहरे की धुंआ है.

२.
बदन पें बूंदें
जुबां से कोहरे की सांस छोडती है
बर्फ़ीले मौसम में
पुराने रिश्ते उभर रहे है
शिमला की मैसेरी बहन निकली, दिल्ली.

३.
अलाव जलाये रास्तों पे
आग से दोस्ती कर लें
कोहरे की खाट खडी हो
चलो,
प्याली में चांद पीया जाये.

४.
शाम से रात तक,
रात से सुबह तक की चेकों पे
कोहरों की दस्तखत है, दिल्ली.

3 comments:

Udan Tashtari said...

सुन्दर शब्द चित्रण!!

अजय कुमार said...

सुंदर शब्दों से सुसज्जित रचना

Alankritaa said...

sundar..