Tuesday, November 10, 2009

वक्त की कलाकारी

वक्त की चालबाजी है ये
कहने को तो उम्र बढता है
और दिन गुजरता है रोज़
पर सही माने तो
सब समय की जालसाजी है
चक्कर पे चक्कर है
गोल गोल दुनियां
समय गुजर रहा है
एक एक दिन करके आगे.
वक्त बीतता है कहके
मुन्ने की हाथ में
झुनझुना थमाया गया है
आज रविवार, कल सोमवार,
फिर कल मंगलवार कहके
दिन को गुजरने दिया जाता है
और ऐसे ही वक्त को
मौका मिलता है आगे जाने का.
वक्त आगे निकलता चलता
उम्र बढती जाती तो
शनिवार को खत्म होके
दिन फिर रविवार ही क्यों? आता.
वक्त की कलाकारी है सब.

2 comments:

संजय भास्‍कर said...

वक्त की कलाकारी है सब.
LAJWAAB RACHNA

अपूर्व said...

baat to sahi ki hai aapne..sochne vali