Friday, November 20, 2009

एक लडकी

एक लडकी
सूरज की पहली किरण जैसी
धरती पे उतरती है
और
टूटकर दूर तक
बिखर जाती है,
पहली बार
किसी चीज का
टूटना
और
बिखर जाना
बुरा नहीं लगता.

4 comments:

मुकेश कुमार तिवारी said...

ऋतुराज जी,

बहुत ही अच्छी उपमाओं में सिमटा हुआ लड़की का जीवनचक्र आँखों के सामने से गुजर गया।

एक अच्छी रचना के लिये बधाईयाँ,

सादर,


मुकेश कुमार तिवारी

संजय भास्‍कर said...

एक अच्छी रचना के लिये बधाईयाँ,

संजय भास्‍कर said...

कम शब्दों में बहुत सुन्दर कविता।
बहुत सुन्दर रचना । आभार

ढेर सारी शुभकामनायें.

SANJAY KUMAR
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

अनिल कान्त said...

kya baat hai