सलाम करता चलूं!
खूश्बू जैसे शब्द खिले हैं.
Thursday, February 11, 2010
उफ्फ!
जाने किस घडी सोया था,
मेरे शब्द कहां गये
और
मेरी अक्ल कहां गई
अब नहीं आती कभी करीब
मेरी सारी कवितायें
विदेश चली गई है. उफ्फ!
1 comment:
Randhir Singh Suman
said...
मेरी सारी कवितायें
विदेश चली गई है. उफ्फ!nice
February 11, 2010 at 4:21 AM
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1 comment:
मेरी सारी कवितायें
विदेश चली गई है. उफ्फ!nice
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