आज साथ साथ बतियाया जाये
न तुम मेरे हुए न वो तुम्हारा
पुराने गम को हंसके भुलाया जाये
बेच के नीयत, जमीर दूकानों में
कुछ कुछ बाज़ार से कमाया जाये
न तुम भूखे रहो न हम भूखे रहे
दाना डालके चिडियां फंसाया जाये
जहां सिर्फ़ तुम रहो और हम रहे
सितारों में चलके घर बनाया जाये
हो रौशन चांद की रात झक सफ़ेद
आज की रात चांद को नहलाया जाये
4 comments:
ांच्छी लगी आपकी रचना शुभकामनायें
मौसम के मद्दे नजर थोड़ी एहतियात की जरुरत है :)
bahut khoob, likhte rahiye...acha likhte hain aap
waah.........bahut sundar.
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