सूरज की पहली किरण जैसी
धरती पे उतरती है
और
टूटकर दूर तक
बिखर जाती है,
पहली बार
किसी चीज का
टूटना
और
बिखर जाना
बुरा नहीं लगता.
तुम्हारे
नहीं होने से,
चांद पे, चिडियों के बारे में
झील पे, मौसम के लिये
तुम्हारी किसी अदाओं पे
आखों पे, तुम्हारी हंसी पे
अपनी बेबसी पे
नहीं लिख सका,
एक भी
कविता।