फुल के ये रसगुल्ले हो गये
रंग बिरंगे किस्से थे जो
सब के सब काले हो गये
रिश्ते सब निठल्ले हो गये
मौडर्न घर की मुनिया हो गई
काली-काली चंदनियां हो गई
कट गई खुशियों की पतंग
गम की बल्ले-बल्ले हो गये
रिश्ते सब निठल्ले हो गये
दोस्ती यारी प्यार मोहब्बत
हंसने भर की बातें हो गई
टूट रहा है सब कुछ तेज़
रिश्ते हौले - हौले हो गये
रिश्ते सब निठल्ले हो गये
घर की दुनियां उजड रही है
मकां आग सी फैल रही है
बेबी, बिट्टू, काकी का घर
गुम सारे मोहल्ले हो गये
रिश्ते सब निठल्ले हो गये
फुल के ये रसगुल्ले हो गये
6 comments:
:)सही बात है ।
बहुत खूब जनाब ।
बैलकुल सेही कहा है रिश्ते सब निठल्ले ही हो गये हैं शुभकामनायें
21वीं सदी में रिश्ते वाकई कुछ ऐसे हो गए हैं।
bhai gajab
LAJWAAB SIR JI
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