Sunday, November 15, 2009

बरखा-२

सुबह उठके वह रिश्ते रिचार्ज करके की जुगत में भिड गया. दोस्त से १०० रुपये उधार लिया और वोडाफ़ोन का वाऊचर खरीद लाया. कल वाली पार्टी में कैसी गाई थी वो, यह फीडबैक तो देना जरूरी था ही. आखिर उसने पूरे डांस फ्लोर को हिला के रख दिया था. वाऊचर को रगड के अपने मोबाईल में जल्दी से नम्बर टाईप करने लगा, मन ही मन सोचा प्री-पेड वाले ऐसे ही तो रगडते है लाईफ़ भर. घन्टी बजी.
राघव: "हैलो."
बरखा: "हैलो."
राघव: "कैसे हो?"
बरखा: (कुनमुनाते हुये) "अच्छी हूं."
"यार तुम तो कल डि.....बा लग रही थी." डि.....बा शब्द को कई किलोमीटर तक खींचा था उसने.
"डिबा! ये क्या होता है?" वो शायद थोडी इरिटेट हुई थी. राघव को ऐसा लगा.
"डि..बा, मतलब..मतलब बहुत खूबसूरत गाया तुमने . वो अंग्रेजी में होता है न, एकदम अप्सरा टाईप." उसने कहा.
"डि..बा! अप्सरा टाईप." थोडी देर चुप रही थी वो. शायद तकिया ठीक कर रही होगी. राघव ने सोचा. फिर वो अचानक बोली.
"अरे स्टुपिड! डिबा नहीं, दिवा. दिवा. अंग्रेजी में उसे दिवा कहते है, बेवकूफ" और जोर-जोर से हंसने लगी वो.
"लेकिन मेरे यहां तो सब डिबा ही बोलते है." राघव बोला.
"डिब्बे लोग डिब्बा ही बोलेंगे न!" उसकी हंसी बडी तेज़ गति से खर्च होने लगी. हंसी की कई इंस्टौलमेंट एक साथ ही जमा कराने लगी राघव को. उसकी एक-एक हंसी चिपकने लगी राघव से.
"प्लीज, इतना मत हंसो. बहुत लोन चढ जायेगा मेरे उपर." राघव बोला. इतने में किसी ने बरखा को आवाज़ दी. फोन पे हल्का ही सुन पाया था वो.
"आ... ई..." कई किलोमीटर तक बरखा ने भी खींचा था इस शब्द को.
"अच्छा मैं रखती हूं. बाद में बात करते है." फोन कट कर दिया बरखा ने. बैलेंस जानने के लिये राघव एसएमएस करने लगा. ताकि जान सके रिश्ता अभी और कितने दिन चलेगा.

2 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत सटीक लेखन!! पसंद आया जी!!

Rajeev Kumar said...

maalikmere to sar ke upar se gujar gaya..may be kyonki main thoda sa busy hoon..lekin 1 baar phir se koshish karoonga samajhne ki..