Tuesday, February 16, 2010

हंसते हंसते रात हुई है.

चार आने की बात हुई है
थोडी सी मुलाकात हुई है
वो भी भीगी, मैं भी भीगा
आंखों से बरसात हुई है.

किसने ये साज़िश की है
किसकी ये खुराफ़ात हुई है
बुझे बुझे से आग थे कल तक
सुलगी सुलगी रात हुई है.

सन्नाटे में शोर बहुत है
खामोशी में बात हुई है
थोडे ज़िन्दा थोडे मर गये
ये कैसी करामात हुई है.

होठों पे सिलवटें पडे हैं
आंखों में करवटें पडे हैं
हम भी नादां वो भी नादां
हंसते हंसते रात हुई है.




5 comments:

dr amit jain said...

बहुत बदिया

Udan Tashtari said...

बढ़िया.

Anonymous said...

It's really awesome..........
i like it very much...........
keep continuing...........
all the best.........

yun hi ek khayal mein said...

बहुत खूब रितु राज क्या बात है आपकी और आपकी रात की रात का अफसाना है ये नहीं है कुछ ये तो गुनगुनाने और ठहर जाने का बहाना है ....

Unknown said...

Damn good buddy. Mind boggling:)