१.
रात बिकी है इतनी जल्दी,
सुबह, धूप की बाज़ार लगी है.
औने पौने भाव तो लेलो,
सूरज की दुकान सजी है.
२.
रात बावली, काली
करवट करवट डांटे
मुझे भोर तक सोने न दे
घर घर निन्दियां बांटे
1 comment:
Waah! Bahut Umda...Badhai!!
http://kavyamanjusha.blogspot.com/
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