Tuesday, February 23, 2010

रात सो गई मीठी होके

१.

रात बिकी है इतनी जल्दी,

सुबह, धूप की बाज़ार लगी है.

औने पौने भाव तो लेलो,

सूरज की दुकान सजी है.


२.

रात बावली, काली

करवट करवट डांटे
मुझे भोर तक सोने न दे
घर घर निन्दियां बांटे

३.
ओ मेरी प्यारी रतिया
मान ले मेरी बतिया
फूंक फूंक के तुझे बुझाऊं
जलती तू सारी रतिया


४.

रात सो गई मीठी होके,

मेरी करवटें नीम सा.

दवा ढूंढता रह गया यारों,

अंधेरे में हकीम सा



1 comment:

रानीविशाल said...

Waah! Bahut Umda...Badhai!!
http://kavyamanjusha.blogspot.com/